आंजनेय दण्डकम् | Anjaneya Dandakam in Hindi Lyrics & Meaning

आंजनेय दण्डकम् – अर्थ, लाभ,और पाठ विधि

आंजनेय दण्डकम् भगवान हनुमान जी को समर्पित एक अत्यंत प्रभावशाली स्तुति है। “आंजनेय” का अर्थ है माता अंजना के पुत्र, अर्थात श्री हनुमान जी। इस दण्डकम् में हनुमान जी के बल, भक्ति, पराक्रम, श्रीराम सेवा, संकट निवारण और राक्षस-विनाशक स्वरूप की महिमा का वर्णन किया गया है।

यह पाठ विशेष रूप से भय, बाधा, नकारात्मक ऊर्जा, रोग, मानसिक अशांति और जीवन के कठिन समय में हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने के लिए किया जाता है।

आञ्जनेय दण्डकम्
Anjaneya Dandakam Lyrics

श्री आञ्जनेयं प्रसन्नाञ्जनेयं
प्रभादिव्यकायं प्रकीर्ति प्रदायं
भजे वायुपुत्रं भजे वालगात्रं भजेहं पवित्रं
भजे सूर्यमित्रं भजे रुद्ररूपं
भजे ब्रह्मतेजं बटञ्चुन् प्रभातम्बु
सायन्त्रमुन् नीनामसङ्कीर्तनल् जेसि
नी रूपु वर्णिञ्चि नीमीद ने दण्डकं बॊक्कटिन् जेय
नी मूर्तिगाविञ्चि नीसुन्दरं बॆञ्चि नी दासदासुण्डवै
रामभक्तुण्डनै निन्नु नेगॊल्चॆदन्
नी कटाक्षम्बुनन् जूचिते वेडुकल् चेसिते
ना मॊरालिञ्चिते नन्नु रक्षिञ्चिते
अञ्जनादेवि गर्भान्वया देव
निन्नॆञ्च नेनॆन्तवाडन्
दयाशालिवै जूचियुन् दातवै ब्रोचियुन्
दग्गरन् निल्चियुन् दॊल्लि सुग्रीवुकुन्-मन्त्रिवै
स्वामि कार्यार्थमै येगि
श्रीराम सौमित्रुलं जूचि वारिन्विचारिञ्चि
सर्वेशु बूजिञ्चि यब्भानुजुं बण्टु गाविञ्चि
वालिनिन् जम्पिञ्चि काकुत्थ्स तिलकुन् कृपादृष्टि वीक्षिञ्चि
किष्किन्धकेतॆञ्चि श्रीराम कार्यार्थमै लङ्क केतॆञ्चियुन्
लङ्किणिन् जम्पियुन् लङ्कनुन् गाल्चियुन्
यभ्भूमिजं जूचि यानन्दमुप्पॊङ्गि यायुङ्गरम्बिच्चि
यारत्नमुन् दॆच्चि श्रीरामुनकुन्निच्चि सन्तोषमुन्​जेसि
सुग्रीवुनिन् यङ्गदुन् जाम्बवन्तु न्नलुन्नीलुलन् गूडि
यासेतुवुन् दाटि वानरुल्​मूकलै पॆन्मूकलै
यादैत्युलन् द्रुञ्चगा रावणुण्डन्त कालाग्नि रुद्रुण्डुगा वच्चि
ब्रह्माण्डमैनट्टि या शक्तिनिन्​वैचि यालक्षणुन् मूर्छनॊन्दिम्पगानप्पुडे नीवु
सञ्जीविनिन्​दॆच्चि सौमित्रिकिन्निच्चि प्राणम्बु रक्षिम्पगा
कुम्भकर्णादुल न्वीरुलं बोर श्रीराम बाणाग्नि
वारन्दरिन् रावणुन् जम्पगा नन्त लोकम्बु लानन्दमै युण्ड
नव्वेलनु न्विभीषुणुन् वेडुकन् दोडुकन् वच्चि पट्टाभिषेकम्बु चेयिञ्चि,
सीतामहादेविनिन् दॆच्चि श्रीरामुकुन्निच्चि,
यन्तन्नयोध्यापुरिन्​जॊच्चि पट्टाभिषेकम्बु संरम्भमैयुन्न
नीकन्न नाकॆव्वरुन् गूर्मि लेरञ्चु मन्निञ्चि श्रीरामभक्त प्रशस्तम्बुगा
निन्नु सेविञ्चि नी कीर्तनल् चेसिनन् पापमुल्​ल्बायुने भयमुलुन्
दीरुने भाग्यमुल् गल्गुने साम्राज्यमुल् गल्गु सम्पत्तुलुन् कल्गुनो
वानराकार योभक्त मन्दार योपुण्य सञ्चार योधीर योवीर
नीवे समस्तम्बुगा नॊप्पि यातारक ब्रह्म मन्त्रम्बु पठियिञ्चुचुन् स्थिरम्मुगन्
वज्रदेहम्बुनुन् दाल्चि श्रीराम श्रीरामयञ्चुन् मनःपूतमैन ऎप्पुडुन् तप्पकन्
तलतुना जिह्वयन्दुण्डि नी दीर्घदेहम्मु त्रैलोक्य सञ्चारिवै राम
नामाङ्कितध्यानिवै ब्रह्मतेजम्बुनन् रौद्रनीज्वाल
कल्लोल हावीर हनुमन्त ओङ्कार शब्दम्बुलन् भूत प्रेतम्बुलन् बॆन्
पिशाचम्बुलन् शाकिनी ढाकिनीत्यादुलन् गालिदय्यम्बुलन्
नीदु वालम्बुनन् जुट्टि नेलम्बडं गॊट्टि नीमुष्टि घातम्बुलन्
बाहुदण्डम्बुलन् रोमखण्डम्बुलन् द्रुञ्चि कालाग्नि
रुद्रुण्डवै नीवु ब्रह्मप्रभाभासितम्बैन नीदिव्य तेजम्बुनुन् जूचि
रारोरि नामुद्दु नरसिंह यन्​चुन् दयादृष्टि
वीक्षिञ्चि नन्नेलु नास्वामियो याञ्जनेया
नमस्ते सदा ब्रह्मचारी
नमस्ते नमोवायुपुत्रा नमस्ते नमः

आंजनेय दण्डकम् क्या है?

आंजनेय दण्डकम् हनुमान जी की एक भक्तिपूर्ण स्तुति है, जिसमें भक्त भगवान हनुमान से रक्षा, साहस, बुद्धि, शक्ति और श्रीराम भक्ति की प्रार्थना करता है।

इस स्तोत्र में हनुमान जी को वायुपुत्र, रामदूत, अंजनीसुत, संकटमोचन, रुद्र स्वरूप और भक्तों के रक्षक के रूप में स्मरण किया जाता है। इसका पाठ मन को स्थिर करता है और भक्त के अंदर आत्मविश्वास, निर्भयता और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है।

आंजनेय दण्डकम् का महत्व

आंजनेय दण्डकम् में भगवान हनुमान जी के दिव्य स्वरूप और उनके अद्भुत पराक्रम का वर्णन मिलता है। यह पाठ भक्त को यह स्मरण कराता है कि हनुमान जी केवल बल और वीरता के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे अटूट भक्ति, सेवा, विनम्रता और निष्ठा के भी सर्वोच्च आदर्श हैं।

जब भक्त श्रद्धा से हनुमान जी का स्मरण करता है, तो उसके जीवन से भय, निराशा और नकारात्मक विचार धीरे-धीरे दूर होने लगते हैं। यह पाठ श्रीराम भक्ति को मजबूत करता है और जीवन में धर्म, साहस और संयम की प्रेरणा देता है।

आंजनेय दण्डकम् के लाभ

1. भय और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा

आंजनेय दण्डकम् का पाठ भय, बुरे विचार, नकारात्मक ऊर्जा और मानसिक अशांति को दूर करने में सहायक माना जाता है। हनुमान जी को स्मरण करने से मन में निर्भयता आती है।

2. संकट और बाधाओं से मुक्ति

हनुमान जी को संकटमोचन कहा जाता है। जो भक्त कठिन समय में आंजनेय दण्डकम् का पाठ करता है, उसे मानसिक बल और सही मार्गदर्शन प्राप्त होता है।

3. आत्मविश्वास और साहस की प्राप्ति

इस पाठ में हनुमान जी के वीर स्वरूप का वर्णन है। इसलिए इसका पाठ करने से भक्त के अंदर साहस, पराक्रम और आत्मविश्वास बढ़ता है।

4. श्रीराम भक्ति में वृद्धि

हनुमान जी श्रीराम के परम भक्त हैं। आंजनेय दण्डकम् का पाठ करने से भक्त के मन में श्रीराम नाम के प्रति श्रद्धा और भक्ति बढ़ती है।

5. मंगलवार और शनिवार के लिए विशेष पाठ

मंगलवार और शनिवार को हनुमान जी की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। इन दिनों आंजनेय दण्डकम् का पाठ करना शुभ और मंगलकारी माना जाता है।

आंजनेय दण्डकम् का पाठ कैसे करें?

आंजनेय दण्डकम् का पाठ शुद्ध मन और श्रद्धा के साथ करना चाहिए।

पाठ विधि

  • सुबह या शाम स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • हनुमान जी की मूर्ति या चित्र के सामने दीपक जलाएं।
  • हनुमान जी को सिंदूर, लाल फूल, गुड़-चना या बूंदी का प्रसाद अर्पित करें।
  • सबसे पहले “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का 11 बार जाप करें।
  • इसके बाद आंजनेय दण्डकम् का पाठ शांत मन से करें।
  • अंत में हनुमान जी की आरती करें और अपनी मनोकामना प्रार्थना के रूप में कहें।

आंजनेय दण्डकम् कब पढ़ना चाहिए?

आंजनेय दण्डकम् का पाठ किसी भी दिन किया जा सकता है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ विशेष शुभ माना जाता है।

आंजनेय दण्डकम् का सरल अर्थ

आंजनेय दण्डकम् में भक्त भगवान हनुमान जी से कहता है कि हे अंजनीपुत्र, हे वायुपुत्र, हे श्रीराम भक्त, आप बल, बुद्धि, वीरता और भक्ति के सागर हैं। आपने श्रीराम जी का कार्य पूर्ण किया, माता सीता का संदेश लाया, लंका में राक्षसों का नाश किया और भक्तों की रक्षा की।

इस स्तुति का मुख्य भाव यह है कि हनुमान जी अपने भक्तों को भय, संकट, रोग, बाधा और शत्रु से बचाते हैं। जो भक्त श्रद्धा से उनका स्मरण करता है, उसे जीवन में साहस, शांति और भगवान श्रीराम की कृपा प्राप्त होती है।

Frequently Asked Questions

आंजनेय दण्डकम् किसे समर्पित है?

आंजनेय दण्डकम् भगवान हनुमान जी को समर्पित है। आंजनेय का अर्थ है माता अंजना के पुत्र।

क्या आंजनेय दण्डकम् रोज पढ़ सकते हैं?

हाँ, इसे रोज पढ़ सकते हैं। यदि रोज संभव न हो तो मंगलवार और शनिवार को इसका पाठ करना शुभ माना जाता है।

आंजनेय दण्डकम् पढ़ने से क्या लाभ होता है?

इसके पाठ से भय, नकारात्मक ऊर्जा, बाधा और मानसिक अशांति दूर होती है। साथ ही भक्त को साहस, आत्मविश्वास और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।

आंजनेय दण्डकम् कब पढ़ना चाहिए?

सुबह या शाम के समय, पूजा के बाद शांत मन से इसका पाठ करना अच्छा माना जाता है। मंगलवार और शनिवार इसके लिए विशेष शुभ दिन हैं।

क्या आंजनेय दण्डकम् संकट मोचन पाठ है?

हाँ, हनुमान जी स्वयं संकटमोचन हैं। इसलिए श्रद्धा से किया गया यह पाठ संकट, भय और बाधाओं से रक्षा करने वाला माना जाता है।

क्या पाठ से पहले कोई मंत्र बोलना चाहिए?

पाठ से पहले “ॐ हनुमते नमः” मंत्र का 11 बार जाप करना शुभ माना जाता है।

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