सालासर हनुमान आरती | Salasar Hanuman ji Aarti in Hindi Lyrics

सालासर हनुमान आरती

नीचे सालासर हनुमान आरती का पाठ दिया गया है। भक्त इसे पूजा, सुंदरकाण्ड पाठ, हनुमान चालीसा पाठ या मंगलवार-शनिवार की आराधना के बाद श्रद्धा से गा सकते हैं।

Salasar Hanuman ji Aarti In Hindi Lyrics

सालासर हनुमान आरती हिंदी लिरिक्स

जयति जय जय बजरंग बाला, कृपा कर सालासर बाला

चैत सुदी पूनम को जन्मे, अंजनी पवन ख़ुशी मन में

प्रकट भये सुर वानर तन में, विदित यस विक्रम त्रिभुवन में

 दूध पीवत स्तन मात के, नज़र गई नभ ओर

तब जननी की गोद से पहुंचे, उदयाचल पर भोर

 अरुण फल लखी रवि मुख डाला

कृपा कर सालासर बाला

 तिमिर भूमंडल में छाई, चिबुक पर इन्द्र ब्रज बाए

तभी से हनुमत कहलाए, द्वय हनुमान नाम पाए

 उस अवसर में रुक गयो, पवन सर्व उन्चास

इधर हो गयो अन्धकार, उत रुक्यो विश्व को श्वास

 भये ब्रम्हादिक बेहाला कृपा कर सालासर बाला

जयति जय जय बजरंग बाला, कृपा कर सालासर बाला

 

सालासर बालाजी कौन हैं?

सालासर बालाजी भगवान हनुमान जी का प्रसिद्ध और अत्यंत पूजनीय स्वरूप है। राजस्थान के सालासर धाम में स्थित बालाजी मंदिर देशभर के भक्तों की आस्था का बड़ा केंद्र माना जाता है।

सालासर बालाजी को संकट दूर करने वाले, भक्तों की मनोकामना पूर्ण करने वाले और जीवन की कठिन परिस्थितियों में रक्षा करने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है। भक्त श्रद्धा से उनके दर्शन, आरती और पाठ करते हैं।

सालासर हनुमान आरती का महत्व

सालासर हनुमान आरती भक्त को भगवान हनुमान जी की भक्ति, शक्ति और कृपा से जोड़ती है। इस आरती में बालाजी महाराज से जीवन के संकट, भय, दुख और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना की जाती है।

आरती करते समय भक्त अपने मन को हनुमान जी के चरणों में समर्पित करता है। इससे मन में श्रद्धा, शांति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है।

सालासर हनुमान आरती कब करनी चाहिए?

सालासर हनुमान आरती किसी भी दिन की जा सकती है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को इसका विशेष महत्व माना जाता है। इसके अलावा हनुमान जयंती, सुंदरकाण्ड पाठ, हनुमान चालीसा पाठ और विशेष मनोकामना पूजा के बाद भी यह आरती करना शुभ माना जाता है।

  • मंगलवार के दिन
  • शनिवार के दिन
  • हनुमान जयंती पर
  • सुंदरकाण्ड पाठ के बाद
  • हनुमान चालीसा पाठ के बाद
  • किसी संकट या बाधा के समय
  • मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करते समय

सालासर हनुमान आरती करने की विधि

  • सुबह या शाम स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें।
  • पूजा स्थान को साफ करके हनुमान जी या सालासर बालाजी का चित्र स्थापित करें।
  • दीपक और धूप जलाएं।
  • हनुमान जी को सिंदूर, लाल फूल, गुड़-चना, बूंदी या चूरमा का भोग अर्पित करें।
  • सबसे पहले ॐ हनुमते नमः मंत्र का जाप करें।
  • इसके बाद श्रद्धा से सालासर हनुमान आरती गाएं।
  • अंत में बालाजी महाराज से अपनी मनोकामना और रक्षा की प्रार्थना करें।

सालासर हनुमान आरती के लाभ

  • मन में भक्ति, शांति और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।
  • भय, चिंता और नकारात्मक विचारों से राहत मिलती है।
  • संकट और बाधाओं से रक्षा की भावना मिलती है।
  • घर में भक्तिमय और पवित्र वातावरण बनता है।
  • हनुमान जी की कृपा और श्रीराम भक्ति प्राप्त होती है।
  • भक्त के मन में साहस, आत्मविश्वास और धैर्य आता है।

सालासर बालाजी को क्या भोग लगाएं?

सालासर बालाजी को श्रद्धा से चूरमा, बूंदी, लड्डू, गुड़-चना, लाल फूल और सिंदूर अर्पित करना शुभ माना जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और क्षमता के अनुसार प्रसाद चढ़ा सकते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सालासर हनुमान आरती किसे समर्पित है?

सालासर हनुमान आरती भगवान श्री सालासर बालाजी, यानी हनुमान जी के प्रसिद्ध स्वरूप को समर्पित है।

सालासर हनुमान आरती कब करनी चाहिए?

यह आरती मंगलवार, शनिवार, हनुमान जयंती, सुंदरकाण्ड पाठ या हनुमान चालीसा पाठ के बाद की जा सकती है।

क्या सालासर बालाजी हनुमान जी का ही स्वरूप हैं?

हाँ, सालासर बालाजी भगवान हनुमान जी का ही पूजनीय स्वरूप हैं। भक्त उन्हें संकटमोचन और मनोकामना पूर्ण करने वाले बालाजी महाराज के रूप में पूजते हैं।

सालासर हनुमान आरती से क्या लाभ होता है?

श्रद्धा से आरती करने से मन में शांति, साहस, आत्मविश्वास और भक्ति बढ़ती है। भक्त इसे संकट, भय और बाधाओं से रक्षा की प्रार्थना के रूप में करते हैं।

सालासर बालाजी को कौन सा प्रसाद चढ़ाया जाता है?

सालासर बालाजी को चूरमा, बूंदी, लड्डू, गुड़-चना, लाल फूल और सिंदूर अर्पित करना शुभ माना जाता है।

निष्कर्ष

सालासर हनुमान आरती भक्त को भगवान बालाजी महाराज की कृपा, शक्ति और सुरक्षा से जोड़ने वाली पवित्र आरती है। जो भक्त श्रद्धा और विश्वास से सालासर बालाजी की आरती करता है, उसे जीवन में साहस, शांति और हनुमान जी की कृपा प्राप्त होती है।

हनुमान चालीसा, स्तोत्र, कवच, आरती और मंत्र